Updated on 09 July 2025 , दोस्तों इस पोस्ट में हम SDM (Sub Divisional Magistrate) या उप जिलाधिकारी पद के बारे में बात करने जा हैं| SDM Officer कैसे बने -SDM Officer कैसे बनते हैं | उप जिलाधिकारी कौन होता है| एक जिले को कई सब डिवीज़न या प्रभाग में बांटा जाता है | हर उप खंड का एक SDM होता है जिसे डिप्टी कलेक्टर के नाम से भी जानते हैं | जब वह राजस्व के विषयों पर कार्य कर होता है तो उसे Deputy Collector कहते हैं
SDM का फुल फॉर्म क्या होता है और SDM को हिंदी में क्या कहते हैं
SDM Full Form : Sub Divisional Magistrate जिसे हिंदी में उप जिलाधिकारी और कुछ राज्यों में उप प्रभागीय न्यायाधीश कहते है। ।जिले की सभी भूमि का लेखा-जोखा एसडीएम के देखरेख में होता है।

SDM Salary
उप-मंडल न्यायाधीश (SDM) पद भारत में एक प्रतिष्ठित समूह ‘A’ सरकारी अधिकारी का पद है, जो आकर्षक वेतन पैकेज के साथ-साथ महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा और जिम्मेदारियां प्रदान करता है। SDM का वेतन सामान्यतः INR 9 लाख प्रति वर्ष (LPA) से लेकर INR 25 लाख प्रति वर्ष (LPA) तक होता है, और शुरुआती मासिक वेतन INR 75,000 से लेकर INR 85,000 तक होता है। जो उम्मीदवार UPSC सिविल सर्विस परीक्षा के माध्यम से यह पद प्राप्त करते हैं, उन्हें राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) द्वारा नियुक्त किए गए उम्मीदवारों की तुलना में अधिक वेतन मिलता है।
सरकारी आवास: एसडीएम को सरकारी आवासीय सुविधा दी जाती है, जो उन्हें अपनी नौकरी के दौरान आवास की चिंता से मुक्त करता है।
सर्वेंट अलाउंस: एसडीएम को घरेलू सेवकों के लिए भी सहायता मिलती है, ताकि उनके घर के कामों को संभालने में कोई परेशानी न हो।
वाहन सुविधा: आधिकारिक कार्यों के लिए एसडीएम को सरकारी वाहन की सुविधा प्राप्त होती है, जिससे वे बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा कर सकते हैं।
मेडिकल सुविधा: एसडीएम को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलती है, जिससे स्वास्थ्य से संबंधित कोई चिंता नहीं रहती।
टेलीफोन और इंटरनेट सुविधा: एसडीएम को टेलीफोन और इंटरनेट की सुविधा भी प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने काम को प्रभावी तरीके से अंजाम दे सकें।
पेंशन और रिटायरमेंट लाभ: एसडीएम को पेंशन और रिटायरमेंट के बाद भी लाभ प्राप्त होते हैं, जो उनकी भविष्यवाणी के लिए सुरक्षा प्रदान करते हैं।
SDM के वेतन संरचना को 7वीं वेतन आयोग द्वारा स्थापित किया गया है, और यह अनुभव स्तर, पोस्टिंग का स्थान, और राज्य नियमों जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
SDM Officer कैसे बने -SDM Officer कैसे बनते हैं
SDM बनने के लिए दो रास्ते हैं
- राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा के द्वारा PCS Exam UPPSC PCS, BPSC PCS, MPPSC PCS
- संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा के द्वारा (आईएएस ) IAS Exam – UPSC CSE
SDM or Deputy Collector उप जिलाधिकारी कैसे बनते हैं
IAS आईएएस के माध्यम से स चयनित व्यक्ति प्रारंभिक कुछ वर्षों तक ही SDM का कार्यभार संभालता है और प्रोन्नत होकर आगे के पदों जैसे मुख्य विकास अधिकारी CDO और जिलाधिकारी DM के पदों को संभालता है|
आईएएस और पीसीएस IAS/PCS दोनों परीक्षाओं के लिए आपको तीन चरणों से गुजरना पड़ता है और अंत में उच्च मेरिट हासिल करनी पड़ती है
- प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary examination)
- मुख्य परीक्षा (Main examination)
- इंटरव्यू (Interview)
दोनों ही परीक्षाओं में सबसे पहले आपको प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करना होगा उसके बाद ही आप मुख्य परीक्षा दे सकते हैं। मुख्य परीक्षा बेहद कठिन होती है, यह परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। उसके बाद आप High Merit आने पर ही आप PCS या IAS Officer बन सकते है और उसके बाद आपकी नियुक्ति एसडीएम पद के लिए होती है
पीसीएस की तैयारी के लिए पूरी पोस्ट पढ़े
SDM एसडीएम बननें हेतु योग्यता क्या होती है |
इस प्रशासनिक पद पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी को किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना आवश्यक है, स्नातक के अंतिम वर्ष के छात्र भी इस पद के लिए आवेदन कर सकते है |
अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो राज्य सिविल सेवा परीक्षा में (UPPSC PCS Exam) के लिए सभी अभ्यार्थियों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु सामान्य वर्ग के लिए 40 वर्ष, एससी/एस टी/ओबीसी के लिए 45 वर्ष और पीडब्लूडी के लिए 55 वर्ष निर्धारित की गयी है |
संघ लोक सेवा आयोग में आयु आयु सीमा 32 वर्ष (सामान्य) के लिए है और अधिकतम मौके 6 हैं
उत्तर प्रदेश लोक सेवा PCS 2023 में 26 रैंक पाने वाले वाराणसी ज़िले के निवासी श्री रविकांत चौबे से बात करने पर उन्होंने बताया कि PCS अधिकारी बनने का सफर बहुत संघषों से भरा हुआ है | कड़ी मेहनत , सटीक तैयारी,विषयों पर पूरी पकड़ और निरंतरता से ही SDM की पोस्ट पायी जा सकती है |
SDM या उपजिलाधिकारी के क्या अधिकार हैं
एसडीएम के उपखंड के सभी तहसीलदारों पर SDM का प्रत्यक्ष नियंत्रण होता है।
इसके अलावा विवाह रजिस्ट्रेशन करवाना, विभिन्न प्रकार के पंजीकरण करवाना, कई तरह के लाइसेंस जारी करवाना, नवीकरण करवाना, राज्यों में लोकसभा और विधानसभा के सदस्यों का चुनाव करवाना आदि कई तरह के अधिकार एसडीएम के पास होते है। इसके अलावा एक एसडीएम आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 और कई अन्य नाबालिग कृत्यों के तहत मेजिस्ट्रेट के पद पर कार्य करता है
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आलोक वत्स बीएड धारक , TET / CTET क्वालिफाइड हैं और साथ ही MCA डिग्री धारक भी हैं | विगत 15 वर्षो से सरकारी जॉब्स जैसे समीक्षा अधिकारी , PCS एग्जाम और तमाम सरकारी नौकरियों से सम्बंधित आर्टिकल लिख रहे हैं और हज़ारो छात्रों को गाइडेंस दे चुके हैं |