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जिला मजिस्ट्रेट और जिला कलेक्टर में क्या होता है अंतर

कई बार ये बहस का विषय हो जाता है कि ज़िला मजिस्ट्रेट और जिला कलेक्टर एक ही पद होता है या अलग अलग ? यहाँ तक की संघ लोक सेवा द्वारा आयोजित सिविल परीक्षा में भाग लेने वाले कई प्रतिभागी भी शुरुआती दौर में इस बहस में पड़ जाते हैं | आज की इस पोस्ट में हम आपको इसी की जानकारी देने वाले हैं कि DM और Collector एक ही पद हैं या फिर अलग अलग | इस पोस्ट से आपको सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बड़ी सहायता मिलेगी | तो चलिए पोस्ट को शुरू करते हैं और जननें का प्रयास करते हैं कि ये दोनों पद क्या हैं | हम दोनों पदों की ज़िम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी हासिल करेंगे |Difference Between DC And DM]

आपने अक्सर सुना और देखा होगा कि लोक संघ सेवा आयोग (UPSC) में सिविल सेवा परीक्षा (CSE) या IAS की तैयारी करने वाले Students को लेकर कहा जाता है वो DM या Collector बनने की तैयारी कर रहे हैं |

जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate)

डिस्ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट (जिला अधिकारी यानी डीएम ) और डिस्ट्रिक्‍ट कलेक्‍टर (District Collector or DC) के बारे में पूरी तरह से समझने से पहले आप को कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना होगा | भारतीय लोकतंत्र में चार स्‍तम्‍भों की बात की गई है.| इसी पर पूरी भारतीय व्यवस्था टिकी है| वो स्तम्भ हैं र्कायपालिका, न्‍यायपालिका, विधायिका और मीडिया. भारतीय संविधान के अनुसार भारत के समस्त विषयों को अलग अलग सूचियों में रखा गया है | कुछ विषय केंद्र की सूची में आते हैं | कुछ विषय समवर्ती सूची में और कुछ विषय राज्य की सूची में | कानून एवं व्यवस्था को राज्य की विषय सूची में रखा गया है और किसी भी जगह पर कानून एवं व्‍यवस्‍था को बरक़रार रखने की जिम्‍मेदारी कार्यपालिका की होती है | चूँकि प्रशानिक स्तर पर राज्य जिले में विभक्त होते हैं अतः कानून व्‍यवस्‍था को बनाए रखने के लिए किसी भी ज़िले में जिस अधिकारी को नियुक्‍त किया जाता है, उसे ही जिलाधिकारी या डिस्‍ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट (District Magistrate/ DM) कहते है |

किस व्‍यवस्‍था के तहत मिलती है डीएम को मजिस्ट्रेटीएल पावर या कार्य शक्ति?


भारत के स्वतंत्र होने से पहले न्‍याय शक्ति और कार्यकारी शक्ति – दोनों एक ही व्‍यक्ति के पास होती थी. स्वतंत्रता के बाद संव‍िधान के अनुच्छेद 50 के तहत लोक सेवा को अलग कर दिया गया. इस प्रकार कलेक्‍टर Colector और डीएम District Magistrate की जिम्‍मेदारियां और कार्यक्षेत्र अलग हो गए. डीएम को CRPC कार्यशक्ति दण्‍ड प्रक्रिया संहिता , 1973 से प्राप्त होती है है. जबकि कलेक्‍टर Collector को भूमि राजस्‍व संहिता (Land Revenue Code), 1959 से प्राप्त होती है.

जिस बात पर होती है कन्फ्यूजन

अधिकतर राज्यों में एक ही व्यक्ति दोनों ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करता है इसीलिए कन्फ्यूज़न होती है हमें | जब कोई आईएएस किसी ज़िले का प्रमुख अधिकारी नियुक्त होता है तो वो जब राजस्व के लिए कार्य करता है तब उसे कलेक्टर कहा जाता है मगर जब वही व्यक्ति उस ज़िले में कानून और व्यवस्था को मैनेज करता है तो उसे हम जिला मेजिस्ट्रेट कहते हैं | मगर ये आवश्यक नहीं है कि दोनों पद पर एक ही व्यक्ति काम करें मगर अलग अलग करेंगे तो जिला मजिस्ट्रेट लॉ एंड आर्डर को मैनेज करने के कारण ज़्यादा प्रभावी होगा |

Power of DC(District Collector)


किसी भी जनपद में राजस्‍व प्रबंधन से जुड़ा सबसे बड़ा अधिकारी डिस्ट्रिक्‍ट कलेक्‍टर ही होता है. राजस्‍व के मामलों में डिविजनल कमीश्‍नर और वित्तीय आयुक्त के जरिए सरकार के प्रति सभी जिम्‍मेदारी डिस्ट्रिक्‍ट कलेक्‍टर की ही होती है. डिस्ट्रिक्‍ट कलेक्‍टर किसी भी ज़‍िले का उच्‍चतम राजस्‍व अधिकारी होता है. आगे जानते हैं कि DC की प्रमुख जिम्‍मेदारियां क्‍या होती हैं.

रेवेन्यू कोर्ट
एक्‍साइज ड्यूटी कलेक्‍शन, सिंचाई बकाया, इनकम टैक्‍स बकाया व एरियर.
राहत एवं पुनर्वास कार्य
भूमि अधिग्रहण का मध्यस्थ और भू-राजस्व का संग्रह
लैंड रिकॉर्ड्स से जुड़ी व्‍यवस्‍था
कृषि ऋण का वितरण.
राष्‍ट्रीयता, अधिवास, शादी, एससी/एसटी, ओबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग जैसे वैधानिक सर्टिफिकेट जारी करना.
जिला बैंकर समन्वय समिति का अध्यक्षता.
जिला योजना केंद्र की अध्यक्षता.

Power of DM (District Magistrate)


DM : डिस्ट्रिक्‍ट मज‍िस्‍ट्रेट भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी होता है. डीएम किसी भी ज़‍िले का सर्वोच्‍च कार्यकारी मजिस्‍ट्रेट अधिकारी है और उनकी जिम्‍मेदारी ज़‍िले में प्रशासन‍िक व्‍यवस्था बनाए रखने की होती है. विभिन्‍न राज्‍यों में डीएम की जिम्‍मेदारियों में अंतर होता है.

ज़‍िले में कानून व्‍यवस्‍था बनाये रखना
पुलिस को नियंत्रित करना और निर्देश देना
डिस्ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट की भूमिका में रहने वाले डिप्‍टी कमीश्‍नर ही आपराधिक प्रशासन का प्रमुख होता है.
अधीनस्थ कार्यकारी मजिस्ट्रेटों का निरीक्षण करना.
मृत्यु दंड के कार्यान्वयन को प्रमाणित करना.
डिस्ट्रिक्‍ट के पास ज़‍िले के लॉक-अप्‍स और जेलों के प्रबंधन की जिम्‍मेदारी होती है.

तो दोस्तों ये थी जानकारी कि डीएम और डीसी में क्या अंतर होता है | उम्मीद करते हैं कि आपको यह पोस्ट पसंद आयी होगी | किसी भी समाधान के लिए कमेंट ज़रूर

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