2024–2025 में दिए गए प्रमुख पुरस्कार और सम्मान: जानिए किसने क्या जीता

हर वर्ष की तरह 2024 और 2025 के बीच का समय भी भारत और विश्व के लिए पुरस्कारों और सम्मानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। यह वह समय था जब विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मान्यता प्राप्त हुई। साहित्य से लेकर संगीत, सिनेमा से लेकर विज्ञान, खेल से लेकर समाज सेवा – हर क्षेत्र में कुछ ऐसे नाम सामने आए जिन्होंने न केवल अपने काम से इतिहास रचा बल्कि भारत को गर्वित भी किया। आइए जानते हैं वर्ष 2024-2025 में दिए गए कुछ प्रमुख पुरस्कारों (Awards in 2024 and 2025), सम्मानों और उनके विजेताओं के बारे में।

2024–2025 में दिए गए प्रमुख पुरस्कार और सम्मान: जानिए किसने क्या जीता
2024–2025 में दिए गए प्रमुख पुरस्कार और सम्मान: जानिए किसने क्या जीता

भारतीय मूल के कलाकारों ने रचा इतिहास

संगीत और मनोरंजन के क्षेत्र में भारतीय मूल के कलाकारों ने वैश्विक मंचों पर भारत का नाम ऊँचा किया। मई 2025 में प्रसिद्ध रैपर और गीतकार राजा कुमारी ने एक नया इतिहास रच दिया। वे American Music Awards (AMA) जीतने वाली पहली भारतीय मूल की महिला कलाकार बनीं। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसमें भारतीय संस्कृति और पश्चिमी संगीत का समावेश देखने को मिला।

इसी तरह, भारतीय-अमेरिकी संगीतकार चंद्रिका टंडन को 2025 के ग्रैमी पुरस्कार में सम्मानित किया गया। उन्होंने न केवल भारतीय रागों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया, बल्कि पश्चिमी श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुंदरता से परिचित कराया।

सिनेमा और टेलीविजन में शानदार प्रदर्शन

फिल्म और टेलीविजन जगत में भी 2024-2025 का साल बेहद फलदायी रहा। मार्च 2025 में हुए ऑस्कर अवॉर्ड्स में पहली बार “बेस्ट स्टंट कोऑर्डिनेशन” जैसी नई श्रेणी जोड़ी गई, जिसमें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की फिल्मों को भी नामांकन मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फिल्मों की कहानी, संगीत और अभिनय को सराहा गया। भारतीय मूल के निर्देशक और कलाकारों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि बॉलीवुड अब सिर्फ भारतीय दर्शकों तक सीमित नहीं है।

इंडियन टेलीविजन अकादमी (ITA) अवॉर्ड्स 2024 में “उड़ने की आशा” नामक धारावाहिक को सर्वश्रेष्ठ शो का खिताब मिला। इस धारावाहिक की कहानी ने महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण भारत की सच्चाई को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

वहीं, गोल्डन ग्लोब 2025 में भी भारतीय मूल के कलाकारों ने सुर्खियाँ बटोरीं। चाहे अभिनय हो या निर्देशन, भारतीय टैलेंट को हॉलीवुड में प्रमुखता से पहचाना गया।

साहित्य और लेखन में श्रेष्ठता

साहित्य की बात करें तो वर्ष 2025 की शुरुआत में हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। उनकी रचनाएं हमेशा ही यथार्थ और गहराई से भरी होती हैं, और यह सम्मान उनकी दशकों की साहित्य सेवा का प्रतीक बना। इसी के साथ कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक ने अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतकर भारतीय भाषाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।

लेखिका सूर्यबाला को व्यास सम्मान 2024 प्रदान किया गया। उनकी सामाजिक व्यंग्य शैली और ग्रामीण जीवन पर आधारित कहानियों को साहित्य जगत में लंबे समय से सराहा जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान

हर साल भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। वर्ष 2025 में कुल 71 व्यक्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें सामाजिक कार्य, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, खेल और कला से जुड़े प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे।

इस वर्ष एक विशेष क्षण तब आया जब हिमाचल प्रदेश के सेब कृषक और भारत के “एप्पल मैन” हरिमन शर्मा को पद्मश्री से नवाजा गया। उन्होंने ऊँचाई वाले क्षेत्रों में नई किस्म के सेब विकसित किए, जिससे किसानों को नई संभावनाएँ मिलीं।

इसके अलावा, राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा मई 2025 में 39 वीरता पुरस्कार दिए गए। इन पुरस्कारों में कई जवानों की बहादुरी की गाथाएँ सुनाई गईं, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अप्रैल 2025 में श्रीलंका सरकार द्वारा “मित्रा विभूषण” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी व्यक्ति को दिया जाता है। यह भारत-श्रीलंका संबंधों की मजबूती का प्रमाण है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा

भारत के औद्योगिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया गया। एयरटेल के संस्थापक सुनील मित्तल को फरवरी 2025 में ब्रिटेन सरकार द्वारा मानद नाइटहुड की उपाधि दी गई। यह सम्मान भारतीय उद्यमिता के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण रहा।

अक्टूबर 2024 में, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को फिजी सरकार ने उनके वैश्विक शांति और योग शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया।

दिसंबर 2024 में भूटान सरकार ने भारतीय शिक्षाविद् अरुण कपूर को ‘डैशो’ (Dasho) की शाही उपाधि प्रदान की, जो भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।

विज्ञान, तकनीक और सार्वजनिक कल्याण में उत्कृष्टता

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की। अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नवाचार पुरस्कार के तहत एक “पोषण ट्रैकर ऐप” को प्रथम स्थान मिला, जिसने महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को ट्रैक करने में अभूतपूर्व योगदान दिया।

ब्राजील की मारियांगेला हंगरिया को मई 2025 में “वर्ल्ड फूड प्राइज़” से सम्मानित किया गया। वे गरीबों के पोषण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यक्रमों के लिए जानी जाती हैं।

राष्ट्रीय थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) को फरवरी 2025 में “Forward Faster Sustainability Award” से नवाजा गया, जो हरित ऊर्जा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों की सराहना थी।

खेल जगत में भारत की पहचान

खेल जगत में वर्ष 2025 की शुरुआत कई बड़े पुरस्कारों और रिकॉर्ड्स से हुई। जनवरी 2025 में दिए गए मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कारों में कई नए चेहरों को स्थान मिला। क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती जैसे खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।

फरवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर ट्रैविस हेड को “एलन बॉर्डर मेडल” से सम्मानित किया गया। भारतीय खिलाड़ियों को भी लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड्स 2025 में नामांकित किया गया, जो वैश्विक स्तर पर खेलों में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, वर्ष 2024 में उन खिलाड़ियों को प्रदान किया गया जिन्होंने अपने असाधारण प्रदर्शन से देश को गौरवांवित किया। इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने ओलंपिक, पैरालंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को एक नई ऊँचाई दी। चाहे शूटिंग हो या हॉकी, शतरंज हो या पैरा एथलेटिक्स, भारत के इन सितारों ने दिखा दिया कि समर्पण, परिश्रम और जुनून से हर बाधा को पार किया जा सकता है।

मनु भाकर: पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतकर रचा इतिहास

शूटिंग की दुनिया में भारत की युवा स्टार मनु भाकर ने पेरिस 2024 ओलंपिक्स में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। वह स्वतंत्र भारत की पहली महिला एथलीट बनीं जिन्होंने एक ही ओलंपिक संस्करण में दो पदक जीतकर देश को गौरवांवित किया। हालांकि शुरुआत में उनके नामांकन को लेकर भ्रम और विवाद उत्पन्न हुआ था। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि उन्होंने आवेदन किया था, जबकि अन्य स्रोतों ने इसका खंडन किया। इस भ्रम के कारण खेल मंत्रालय को आलोचना का सामना करना पड़ा, परंतु बाद में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाकर उन्हें खेल रत्न से सम्मानित किया गया। उनका यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी है।

हरमनप्रीत सिंह: हॉकी टीम को लगातार दो ओलंपिक में दिलाया कांस्य

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अपने नेतृत्व और खेल कौशल से एक बार फिर भारत को ओलंपिक पदक दिलाया। पेरिस 2024 ओलंपिक में टीम को कांस्य पदक दिलाने वाले हरमनप्रीत इससे पहले टोक्यो 2020 में भी टीम को इसी मुकाम तक पहुँचा चुके हैं। यह लगातार दूसरी बार है जब भारत ने ओलंपिक में हॉकी में पदक हासिल किया, और इसका बहुत बड़ा श्रेय हरमनप्रीत की कप्तानी और पेनल्टी कॉर्नर पर उनकी जबरदस्त फिनिशिंग को जाता है। उनका यह सम्मान भारतीय हॉकी के स्वर्णिम पुनर्जागरण का प्रतीक माना जा रहा है।

प्रवीण कुमार: पैरालंपिक में स्वर्ण पदक और एशियाई रिकॉर्ड

पैरा एथलीट प्रवीण कुमार ने पेरिस पैरालंपिक्स 2024 में पुरुषों की हाई जंप T64 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतते हुए नया एशियाई रिकॉर्ड कायम किया। उन्होंने न केवल पदक जीता बल्कि यह साबित कर दिया कि मानसिक और शारीरिक बाधाएँ भी दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने टिक नहीं सकतीं। उनका यह प्रदर्शन पूरे देश के लिए प्रेरणास्पद रहा और पैरा स्पोर्ट्स में भारत की मजबूत उपस्थिति को और सुदृढ़ किया।

डी गुकेश: शतरंज में उभरते सितारे

भारत के युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश शतरंज की दुनिया में एक उभरते हुए सितारे के रूप में तेजी से प्रसिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने 2024 में कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में जीत हासिल की और भारत की वैश्विक शतरंज स्थिति को मजबूत किया। उनकी रणनीतिक क्षमता, गहराई से सोचने की शक्ति और धैर्य ने उन्हें विश्व स्तर पर एक नया मुकाम दिलाया। उनकी प्रतिभा को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया।

मनु भाकर के नामांकन पर विवाद: क्या था पूरा मामला?

मनु भाकर के नामांकन को लेकर शुरुआत में कुछ असमंजस की स्थिति बनी रही। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया कि उन्होंने आवेदन नहीं किया था, जबकि अन्य स्रोतों का दावा था कि उनका आवेदन जमा किया गया था लेकिन उसे मान्यता नहीं मिली। इस मुद्दे पर खेल मंत्रालय को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, परंतु बाद में मामले की समीक्षा के बाद उन्हें योग्य मानते हुए सूची में शामिल किया गया। इस प्रकरण ने खेलों में पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता की आवश्यकता को उजागर किया।

मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार का महत्व

भारत का यह सर्वोच्च खेल सम्मान खिलाड़ियों को उनके निरंतर और असाधारण प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। वर्ष 1991-92 में इसकी स्थापना की गई थी और यह पुरस्कार अब तक कई ऐसे खिलाड़ियों को मिल चुका है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को ऊँचा किया है। यह पुरस्कार हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने अपने समय में हॉकी को विश्व मंच पर पहचान दिलाई थी।

यह पुरस्कार न केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को मान्यता देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को खेलों में करियर बनाने और देश के लिए खेलने की प्रेरणा भी देता है। इसमें एक पदक, प्रशस्ति पत्र और नकद राशि दी जाती है।

निष्कर्ष

2024-2025 का समय भारत के लिए पुरस्कारों और सम्मानों की दृष्टि से गौरवशाली रहा। भारतीय मूल के लोगों ने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम रोशन किया। ये पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं हैं, बल्कि ये देश की वैश्विक छवि, उसकी सांस्कृतिक शक्ति, और उसकी प्रतिभा का प्रतीक हैं। यह समय हमें प्रेरणा देता है कि परिश्रम, नवाचार और निष्ठा से हम किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर को छू सकते हैं।

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