EVM Full Form, काम करने का तरीका और इसके पीछे की तकनीक

EVM क्या है? जानिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन कैसे काम करती है , चुनाव में इस्तेमाल होने वाली EVM मशीन की पूरी जानकारी हिंदी में , EVM कैसे काम करती है? जानिए इसके फायदे, सुरक्षा और विवाद, EVM से जुड़ी हर जरूरी बात – परिभाषा, कार्यप्रणाली और विवाद – EVM से कैसे होता है वोटिंग? जानिए इस तकनीक का सच

EVM का फुल फॉर्म और परिभाषा

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) .  EVM ka Full Form Hai Electronic Voting Machines इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का प्रयोग भारत में आम चुनाव तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव में आंशिक रूप से 1999 में शुरू हुआ तथा 2004 से इसका पूर्ण इस्तेमाल हो रहा है। ईवीएम से पुरानी मतपत्र प्रणाली की तुलना में वोट डालने के समय में कमी आती है तथा कम समय में परिणाम घोषित करती है। ईवीएम के इस्तेमाल से जाली मतदान फर्जी वोटिंग तथा बूथ कब्जा करने की घटनाओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। इसे निरक्षर लोग ईवीएम को मत पत्र प्रणाली से अधिक आसान पाते हैं। मत-पेटिकाओं  की तुलना में ईवीएम को पहुंचाने तथा वापस लाने में आसानी होती है।

EVM इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन कैसे काम करती है

भारत में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का प्रयोग 1982 में केरल से शुरू हुआ था. पुरानी कागजी मतपत्र प्रणाली की तुलना में ईवीएम के द्वारा वोट डालने और परिणामों की घोषणा करने में कम समय लगता है. लेकिन EVM के प्रयोग को लेकर भारत के राजनीतिक दलों में एकमत नहीं है. भारत के कई राज्यों में आजकल चुनाव का माहौल है | ऐसे में चुनाव को सही और स्मार्ट तरीके से कराना भारत निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती है | चुनाव कि बात हो और ईवीएम के बारे में बात न हो ये असंभव है |

Electronic Voting Machine (EVM) in India with voter casting vote – ईवीएम क्या है हिंदी में
Electronic Voting Machine (EVM) in India with voter casting vote – ईवीएम क्या है हिंदी में

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पांच-मीटर केबल द्वारा जुड़ी दो यूनिटों-एक कंट्रोल यूनिट एवं एक बैलेटिंग यूनिट-से बनी होती है। कंट्रोल यूनिट पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास होती है तथा बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अंदर रखी होती है। पुराने तरीके के बैलेट पेपर जारी करने के बजाए, कंट्रोल यूनिट का प्रभारी मतदान अधिकारी बैलेट बटन को दबाता है । यह मतदाता को बैलेटिंग यूनिट पर अपनी पसंद के अभ्यर्थी एवं प्रतीक के सामने नीले बटन को दबाकर अपना मत डालने के लिए सक्षम बनाता  है

"भारत में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की पूरी जानकारी हिंदी में"
भारत में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की पूरी जानकारी हिंदी में

ईवीएम से जुड़े कुछ तथ्य- EVM FACTS

  • ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल मई, 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केन्द्रों पर हुआ|
  • केन्द्र सरकार ने  फरवरी, 1990 में अनेक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों वाली चुनाव सुधार समिति बनाई। भारत सरकार ने ईवीएम के इस्तेमाल संबंधी विषय विचार के लिए चुनाव सुधार समिति को भेजा।

ईवीएम की विशेषताएँ (features of EVM in Hindi)

  • यह छेड़छाड़ मुक्त तथा संचालन में सरल है
  • नियंत्रण इकाई के कामों को नियंत्रित करने वाले प्रोग्राम “एक बार प्रोग्राम बनाने योग्य आधार पर”माइक्रोचिप में नष्ट कर दिया जाता है। नष्ट होने के बाद इसे पढ़ा नहीं जा सकता, इसकी कॉपी नहीं हो सकती या कोई बदलाव नहीं हो सकता।
  • ईवीएम मशीनें अवैध मतों की संभावना कम करती हैं, गणना प्रक्रिया तेज बनाती हैं तथा मुद्रण लागत घटाती हैं।
  • ईवीएम मशीन का इस्तेमाल बिना बिजली के भी किया जा सकता है क्योंकि मशीन बैट्री से चलती है।
  • यदि उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक नहीं होती तो ईवीएम के इस्तेमाल से चुनाव कराये जा सकते हैं।
  • एक ईवीएम मशीन अधिकतम 3840 वोट दर्ज कर सकती है।

EVM के फायदे (Advantages of EVM):

  • समय की बचत होती है क्योंकि वोटिंग और काउंटिंग दोनों तेज होती हैं
  • चुनाव कराने की लागत कम हो जाती है, कागज़ और स्याही की जरूरत नहीं होती
  • पर्यावरण के लिए अनुकूल है क्योंकि बैलेट पेपर का उपयोग नहीं होता
  • वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ती है
  • धांधली जैसे बूथ कैप्चरिंग और फर्जी वोटिंग की संभावना कम हो जाती है
  • मतदाता आसानी से बटन दबाकर वोट दे सकते हैं, पढ़े-लिखे न होने पर भी
  • मशीनें पोर्टेबल होती हैं और दूरदराज़ इलाकों में भी ले जाई जा सकती हैं
  • VVPAT की मदद से वोटर यह देख सकता है कि उसका वोट सही स्थान पर गया है
  • मतगणना में मानवीय त्रुटियों की संभावना बेहद कम होती है

ईवीएम से बूथ कैप्चरिंग कैसे रोके-

बूथ कैप्चरिंग से तात्पर्य यदि यह है कि मत पेटियों या मत पत्रों को ले जाना या उन्हें क्षतिग्रस्त करना तो ईवीएम के उपयोग द्वारा उस बुराई को नहीं रोका जा सकता है क्योकि ईवीएम भी उपद्रवियों द्वारा बलपूर्वक भी ले जाए जा सकते हैं या क्षतिग्रस्तं किए जा सकते हैं। परन्तु यदि बूथ कैप्चलरिंग को उपद्रवियों द्वारा मतदान कर्मियों को धमकाने तथा मतदान पत्रों में प्रतीक पर मुहर लगाने तथा चंद मिनटों में भाग निकलने के मामले के रूप में देखा जाता है तो इसे ईवीएम के उपयोग द्वारा रोका जा सकता है।

ईवीएम की प्रोग्रामिंग इस प्रकार की गई है कि मशीनें एक मिनट में केवल पांच मतों को ही दर्ज करेगी। चूंकि मतों का दर्ज किया जाना अनिवार्य रूप से कंट्रोल यूनिट तथा बैलेटिंग यूनिट के माध्य म से ही किया जाना, इसलिए उपद्रवियों की संख्या चाहे

कितनी भी हो, वे केवल 5 मत प्रति मिनट की दर से ही मत दर्ज कर सकते हैं। मत पत्रों के मामले में, उपद्रवी एक मतदान केन्द्र के लिए निर्दिष्ट सभी 1000 विषम मत पत्रों को आपस में बांट सकते हैं, उन पर मुहर लगा सकते हैं, उन्हें मत पेटियों में ठूंस सकते हैं तथा पुलिस बलों के अधिक संख्या में पहुंचने से पहले भाग सकते हैं। प्रत्येक आधे घंटे में उपद्रवी अधिकतम 150 मतों को ही दर्ज कर सकते हैं और तब तक इस बात की संभावनाएं हैं कि पुलिस बल पहुंच जाए।

इसके अतिरिक्त, पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी द्वारा मतदान केन्द्रव के भीतर जैसे ही कुछ बाहरी व्य क्तियों को देखा जाए तो उनके पास “बंद” बटन दबाने का विकल्पे हमेशा रहेगा। एक बार ‘बंद’ बटन दबा देने के बाद कोई भी मत दर्ज करना संभव नहीं होगा और इससे बूथ पर कब्जा करने वालों का प्रयास निष्फल हो जाएगा।

EVM क्या है और इसका फुल फॉर्म क्या होता है?

EVM का फुल फॉर्म है Electronic Voting Machine। यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसका उपयोग चुनावों में मतदाताओं से वोट लेने और उन्हें सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है।


EVM मशीन कैसे काम करती है?

EVM दो मुख्य भागों से बनी होती है – Ballot Unit और Control Unit। मतदाता Ballot Unit पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने वाला बटन दबाता है, और यह वोट Control Unit में सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड हो जाता है।


क्या EVM से वोटिंग सुरक्षित है?

हाँ, EVM को सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। यह मशीन इंटरनेट या किसी नेटवर्क से जुड़ी नहीं होती, जिससे इसे हैक करना बेहद कठिन होता है।


EVM और बैलेट पेपर में क्या फर्क है?

EVM इलेक्ट्रॉनिक मशीन होती है जबकि बैलेट पेपर एक कागज़ की पर्ची होती है। EVM से वोटिंग तेज़, सटीक और कम खर्चीली होती है, जबकि बैलेट पेपर में समय, लागत और गड़बड़ी की संभावना अधिक होती है।


भारत में EVM कब शुरू हुई?

भारत में EVM का प्रयोग पहली बार 1982 में केरल के पारावूर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में प्रयोगात्मक रूप से किया गया था। पूरे देश में इसका व्यापक उपयोग 2004 के आम चुनाव से शुरू हुआ।


VVPAT क्या है और यह क्यों जरूरी है?

VVPAT का फुल फॉर्म है Voter Verifiable Paper Audit Trail। यह EVM के साथ जुड़कर मतदाता को यह देखने की सुविधा देता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं। यह पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ाता है।


क्या EVM को हैक किया जा सकता है?

EVM को इंटरनेट या किसी नेटवर्क से नहीं जोड़ा जाता, इसलिए इसे रिमोटली हैक करना लगभग असंभव है। इसके अलावा चुनाव आयोग मशीनों की सुरक्षा और जांच के लिए सख्त प्रक्रियाएँ अपनाता है।


EVM कितनी बार प्रयोग की जा सकती है?

EVM को कई बार चुनावों में प्रयोग किया जा सकता है। प्रत्येक चुनाव के पहले मशीन को रीसेट किया जाता है और नई सील लगाई जाती है।


क्या सभी चुनावों में VVPAT का प्रयोग होता है?

हाँ, भारत के सभी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अब VVPAT का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

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