Career after 30: अगर आपकी उम्र 30 के आसपास है और मन में बार-बार ये ख्याल आता है कि “अब तो बहुत देर हो गई”, तो रुकिए। ये सोच आज भारत के लाखों लोगों के मन में है। कोई private job में फंसा है, कोई exam देते-देते थक चुका है, तो कोई बस salary से खुश नहीं है। 30 की उम्र अक्सर ऐसा मोड़ होती है जहाँ इंसान खुद से सवाल करने लगता है – “मैं ज़िंदगी में कर क्या रहा हूँ?” –

सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि आप अकेले नहीं हैं। बाहर से लगता है कि सब settled हैं, सब आगे निकल गए हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि ज़्यादातर लोग बस निभा रहे हैं। Social media पर जो success दिखती है, उसके पीछे confusion, डर और regret छुपा होता है। फर्क बस इतना है कि कोई बोलता नहीं।
Degree नहीं, Skill का ज़माना
30 तक career न बनने का मतलब ये नहीं कि आप capable नहीं हैं। ज़्यादातर मामलों में वजह होती है – confusion, गलत guidance, या डर। कभी सही direction नहीं मिली, कभी family pressure आ गया, तो कभी “safe job” ने risk लेने नहीं दिया। साल निकलते गए और हम बस सोचते रह गए।
लोग सोचते हैं कि 30 मतलब late हो जाना। लेकिन हकीकत ये है कि 30 के बाद इंसान के पास वो चीज़ें होती हैं जो 20 में नहीं होती – life experience, जिम्मेदारी की समझ, और seriousness। अब आप ये नहीं सोचते कि “देखेंगे”, अब आप सोचते हैं कि “करना ही है”। यही mindset सबसे बड़ी ताकत है।
आज के समय में career degree से नहीं, skill से बनता है। अगर आपके पास कोई ऐसी skill है जो market में काम आती है, तो उम्र कोई रुकावट नहीं। Writing, digital marketing, video editing, sales, tech tools – ऐसी कई skills हैं जो 30 के बाद भी सीखी जा सकती हैं और income दे सकती हैं। फर्क बस consistency का है।
सबसे बड़ा डर – अब क्या फायदा
बहुत लोग इसलिए शुरू नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि पहले पूरा plan clear हो जाए। लेकिन सच्चाई ये है कि clarity action से आती है, सोचने से नहीं। अगर आज आप छोटा सा कदम भी उठाते हैं – सीखना शुरू करते हैं – तो 6 महीने बाद आप आज से बहुत आगे होंगे।
Comparison का ज़हर
30 की उम्र में सबसे बड़ा दुश्मन comparison होता है। दोस्त की शादी, किसी की promotion, किसी का business – सब देखकर लगता है कि हम पीछे रह गए। लेकिन हर इंसान की journey अलग होती है। किसी की शुरुआत जल्दी होती है, किसी की देर से, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि देर से शुरू करने वाला जीत नहीं सकता।
“अब क्या फायदा?” यही वो लाइन है जो सबसे ज़्यादा लोगों का career मार देती है। सच ये है कि अगले 5 साल वैसे भी निकल जाएंगे। सवाल बस ये है कि 5 साल बाद आप regret के साथ खड़े होंगे या confidence के साथ।
30 के बाद career बनाने का मतलब ये नहीं कि सब छोड़कर जोखिम ले लो। समझदारी ये है कि जो कर रहे हो, उसके साथ-साथ सीखो। Income और learning साथ चलें। धीरे-धीरे direction बदले, लेकिन रुको मत।
30 की उम्र में career न बनना failure नहीं है। Failure तब है जब आप कोशिश करना छोड़ देते हैं। अगर आज भी आपके मन में कुछ बेहतर करने की इच्छा है, तो समझ लीजिए खेल खत्म नहीं हुआ है। कई लोगों की असली कहानी 30 के बाद ही शुरू होती है।
👉 देर सिर्फ तब होती है, जब आप आज भी शुरुआत नहीं करते।
30 के बाद सबसे बड़ा दुश्मन: Overthinking
30 की उम्र तक आते-आते इंसान ज़्यादा सोचने लगता है। हर फैसला लेने से पहले सौ सवाल दिमाग में घूमते हैं — पैसा, family, security, society। Overthinking धीरे-धीरे action को मार देती है। सच्चाई ये है कि ज़्यादातर गलत फैसले action से नहीं, action ना लेने से होते हैं। अगर आप हर चीज़ perfect होने का इंतज़ार करेंगे, तो साल निकल जाएंगे।
“जो चल रहा है वही सही है” वाला Trap
बहुत लोग कहते हैं — “चल रहा है, जैसे-तैसे निभा लेते हैं”। ये mindset सबसे खतरनाक है। क्योंकि बाहर से लगता है सब ठीक है, लेकिन अंदर इंसान रोज़ मरता है। Career ऐसा होना चाहिए जो सिर्फ बिल भरने के लिए नहीं, बल्कि self-respect भी दे। 30 के बाद comfort zone छोड़ना मुश्किल होता है, लेकिन वहीं से growth शुरू होती है।
ये सच है कि 30 के बाद जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं — parents, शादी, बच्चे, EMI। इसलिए career बनाने का तरीका भी practical होना चाहिए। सब कुछ छोड़कर risk लेना हर किसी के लिए possible नहीं। सही रास्ता ये है कि जो काम अभी कर रहे हैं, उसी के साथ धीरे-धीरे नई skill सीखें। रात के 1–2 घंटे अगर लगातार दिए जाएँ, तो एक साल में ज़िंदगी की दिशा बदल सकती है।
Career Switch का सही समय कैसे पहचानें?
Career switch का मतलब अचानक resignation नहीं होता। सही समय तब होता है जब:
- आपकी नई skill से small income आने लगे
- आपको खुद पर भरोसा होने लगे
- डर से ज़्यादा excitement महसूस हो
अगर अभी डर ज़्यादा है, तो switch नहीं, preparation phase में रहें। गलत timing सबसे अच्छा career भी खराब कर सकती है।
छोटे Steps, लेकिन रोज़ के Steps
Career change overnight नहीं होता। रोज़ के छोटे steps — सीखना, practice करना, fail होना, फिर उठना — यही असली process है। अगर आप रोज़ 1% भी बेहतर बनते हैं, तो 1 साल बाद आप वही इंसान नहीं रहेंगे जो आज हैं। 30 के बाद consistency आपकी सबसे बड़ी पूँजी होती है।
अगर आज नहीं शुरू किया तो क्या होगा?
अगर आज भी आपने खुद से कहा — “कल देखेंगे” — तो 35 पर भी वही सवाल रहेगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि regret और गहरा हो जाएगा। Future का डर आपको रोक रहा है, लेकिन यही डर आपको आगे भी धकेल सकता है — बस फैसला आपका है।
आलोक वत्स बीएड धारक , TET / CTET क्वालिफाइड हैं और साथ ही MCA डिग्री धारक भी हैं | विगत 15 वर्षो से सरकारी जॉब्स जैसे समीक्षा अधिकारी , PCS एग्जाम और तमाम सरकारी नौकरियों से सम्बंधित आर्टिकल लिख रहे हैं और हज़ारो छात्रों को गाइडेंस दे चुके हैं |