भारतीय लोक नृत्य – भारत के प्रसिद्ध और महत्पूर्ण लोक नृत्य

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दोस्तों सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र में हमेशा एक या दो सवाल भारतीय नृत्य कला के बारे में पूछा ही जाता है |  सामान्य भाषा में कहे, तो ऐसा नृत्य जो लोगो में या समुदाय में प्रिय हो, वह लोक नृत्य कहलाता है| आज हम आपको भारत के प्रसिद्ध लोक नृत्यों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुत उपयोगी होंगे | लाल रंग में अंकित जानकारी बेहद ही महत्पूर्ण हैं | तो चलिए प्रारंभ  करते हैं

 

भारतीय लोक नृत्य की सूची

सबसे पहले भारतीय लोक नृत्यों पर एक निगाह डालते हैं

List of Indian Folk Dance In Hindi

क्र.राज्यप्रसिद्ध लोक नृत्य
1मध्य प्रदेशपंडवानी, गणगौर नृत्य
2असमबिहू
3उत्तरप्रदेशनौटंकी, कत्थक
4गुजरातगरबा
5कर्णाटकयक्षगान
6पंजाबभांगड़ा, गिद्दा
7राजस्थानकालबेलिया, घुमर, तेरहताली, भवाई नृत्य
8महाराष्ट्रतमाशा, लावणी
9उत्तराखंड(उत्तरांचल)कजरी, छौलिया
10जम्मू-कश्मीरकूद दंडीनाच, रुऊफ
11हिमाचल प्रदेशछपेली,दांगी, थाली
12बिहारछऊ, विदेशिया, जाट- जतिन
13केरलकथकली, मोहिनीअट्टम
14नागालैंडलीम, छोंग
15पश्चिम बंगालजात्रा,ढाली, छाऊ
16गोवामंदी, ढकनी
17आन्ध्र प्रदेशकुचीपुडी
18झारखंडविदेशिया, छऊ
19उड़ीसाओडिसी, धुमरा
20छत्तीसगढ़पंथी नृत्य

लोक नृत्य की सूची देखने के बाद चलिए राज्य वार जानकारी लेते हैं

 

मध्य प्रदेश के लोक नृत्य (Madhya Pradesh Folk Dance) –

गणगौर नृत्य- मध्यप्रदेश के निमाड़ में क्षेत्र का सबसे लोकप्रिय नृत्य है गणगौर. चैत्र मास की नवरात्रि में गणगौर नृत्य किया जाता है. यह पर्व माँ गौरी और शिव की उपासना के लिए होता है. इसमें रथ सर पर रख कर नृत्य किया जाता है.

पंडवानी – पंडवानी नृत्य मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में किया जाता है .यह एकल लोक नृत्य है. इसमें गायन एवं नृत्य एक ही व्यक्ति के द्वारा किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से पांड्वो पर आधारित घटनाओं का चित्रण किया जाता है.

असम के लोक नृत्य (Assam Folk Dance) –

बिहू – भारत के असम राज्य का लोक नृत्य है बिहू. बिहू नृत्य असम की कछारी जनजाति के द्वारा किया जाता है. बिहू नृत्य फसल की कटाई के दौरान ही किया जाता है. यह नृत्य साल में तीन बार मनाया जाता है. बिहू नृत्य की वेशभूषा बहुत ही अधिक साधारण होती है, इसे करते समय पारम्परिक वस्त्र जैसे धोती, गमछा आदि पहना जाता है.

उत्तर प्रदेश के लोक नृत्य (Uttar Pradesh Folk Dance) –

नौटंकी नृत्य – नौटंकी नृत्य को छंद, दोहा, हरी गीतिका, कव्वाली , गजल आदि के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है. इसमें गायन, अभिनय, नृत्य आदि कई सारी विधाएं शामिल रहती है. यह बहुत ही रोचक नृत्य होता है. भारत के उत्तर प्रदेश में किया जाने वाला नौटंकी लोक नृत्य प्राचीनकाल से ही प्रसिद्ध है. नौटंकी में बहुत से रस शामिल रहते है जैसे हास्य रस, वीर रस आदि. नौटंकी में प्रस्तुत की जाने वाली कथा किसी के जीवन पर आधारित भी हो सकती है. इसकी समयावधी बहुत कम होती है, जिसमे गाना, नाचना शामिल होता है. नौटंकी में कई सारे वाद्य नृत्य भी उपयोग किये जाते है.

कत्थक: कथाओं के संवाद को अपनी अभिव्यक्ति से प्रकट करना इस लोक नृत्य की खासियत है 

गुजरात के लोक नृत्य (Gujarati Folk Dance) 

गरबा – गरबा गुजरात का लोक नृत्य है, लेकिन यह भारत के कई हिस्सों में किया जाता है, यह नवरात्री के अवसर पर किया जाता है. गरबा नृत्य के द्वारा माँ दुर्गा की आराधना की जाती है. गरबा नृत्य नवरात्री में पुरे भारत में किया जाता है.

कर्णाटक के लोक नृत्य (Karnataka folk dance

यक्षगान – यक्षगान एक पारम्परिक नृत्य नाटिका है. जो कर्णाटक प्रदेश में की जाती है. इस नृत्य को विशेष तौर पर धान के खेतो में, रात के समय प्रस्तुत किया जाता है. जिसमे युद्ध से जुड़े पहलुओं को दर्शाया जाता है.

पंजाब के लोक नृत्य (Punjab folk dance

भांगड़ा – मुख्यतः यह लोक नृत्य पुरुषो द्वारा किया जाता है, पंजाब में इसे त्योहारों और उत्सवो पर किया जाता है.

गिद्दा – पंजाब में ही एक और लोक नृत्य प्रसिद्ध है, जिसका नाम है गिद्दा. यह नृत्य महिलों द्वारा पारम्परिक पंजाबी वस्त्र पहन कर किया जाता है.

राजस्थान के लोक नृत्य (Folk Dance of Rajasthan) 

घुमर – घुमर नृत्य राजस्थान में प्रत्येक त्यौहार, उत्सव, समारोह में प्रमुखता से किया जाने वाला नृत्य है. इसे स्त्रियों द्वारा ही किया जाता है. महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले लम्बे घाघरे इस नृत्य का विशेष आकर्षण होते है.

कालबेलिया नृत्य – कला और संस्कृति से भरपूर यह प्रदेश है. यहाँ पर कालबेलिया नाम की जनजाति होती है, जिनके द्वारा किया गया नृत्य कालबेलिया नृत्य कहलाता है.

तेरहताली नृत्य –  यह नृत्य महिलों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है एवं पुरुषो के द्वारा भजन गाये जाते है. इस नृत्य में महिलाएं अपने शरीर पर मंजीरो को बांधती है एवं गीत की लय के साथ उन्हें बजाती है.

भवाई नृत्य – राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में किया जाने वाला भवाई नृत्य बहुत अधिक लोकप्रिय है. इस नृत्य में मटकों को सर पर रख कर नृत्य किया जाता है. इन मटकों की संख्या 8 से 10 भी हो सकती है. इस नृत्य की खासियत यह है की नृत्य करते समय नर्तकी किसी गिलास या थाली के कटाव पर या तलवार पर खड़े हो कर नृत्य करती है.

महाराष्ट्र के लोक नृत्य (Maharashtra folk dance) –

तमाशा – यह महाराष्ट्र में किया जाने वाला नाटिका नृत्य है. ज्यादातर लोक नाटिका में पुरुष ही मुख्य भूमिका निभाते है लेकिन तमाशा में मुख्य भूमिका महिलाएं ही निभाती है. यह बहुत ही सफल लोक नृत्य है. इसमें हार्मोनियम , घुंघरू, मंजीरा, आदि यंत्रों का प्रयोग किया जाता है. तमाशा का प्रस्तुतीकरण प्रायः कोल्हाटी समुदाय के द्वारा किया जाता है.

लावणी – लावणी महाराष्ट्र का सबसे अधिक लोकप्रिय नृत्य हैं. लावणी नृत्य की लोकप्रियता का अन्दाज इस बात से लगाया जा सकता है कि लावणी नृत्य का प्रयोग फिल्मों में भी किया जाता हैं. यह नृत्य विशेष पारंपरिक परिधान में किया जाता है, जिसमे न्रात्यांगना 9 मीटर के साड़ी पहनती है. लावणी नृत्य में आध्यात्म एवं श्रृंगार दोनों ही भावों का मेल होता है.

जम्मू-कश्मीर के लोक नृत्य (Jammu and Kashmir folk dance) –

रऊफ नृत्य – भरत के जम्मू-कश्मीर में लोकप्रिय यह नृत्य विशेष रूप से फसल की कटाई के उपलक्ष्य में किया जाता है. यह नृत्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा के द्वारा ही किया जाता है.

छतीसगढ़ के लोक नृत्य (Chhattisgarh folk dance) –

पंथी नृत्य –  छतीसगढ़ के महान संत गुरु घासीदास के पंथ से ही पंथी नृत्य का नामकरण हुआ है. मुख्यतः निर्गुण भक्ति पर आधारित यह लोक नृत्य छत्तीसगढ़ के सतनामी समुदाय के द्वारा किया जाता है. इस नृत्य में नर्तक झांझ एवं मृदंग की ध्वनी पर सफ़ेद धोती पहन कर नृत्य करते है. इस नृत्य के दौरान अचंभित करने वाले कारनामे भी दिखाए जाते हैं. यह नृत्य आध्यात्मिक भावनाओं पर आधारित होता है.

आन्ध्र प्रदेश के नृत्य (Andhra Pradesh folk dance) –

कुचिपुड़ी – इस नृत्य का नाम आँध्रप्रदेश के एक गाँव कुचिपुडी  के नाम पर ही पड़ा है. यह नृत्य पुरे दक्षिण भारत में प्रसिद्ध है. कुचिपुड़ी नृत्य का प्रदर्शन पारंपरिक तरीके से किया जाता है. नृत्य से पहले मंच पर पूजन किया जाता है. इस नृत्य में कर्णाटक संगीत के साथ मृदंग, वायलीन आदि यंत्रों का प्रयोग किया जाता है. इसमें विशेष आभूषण एवं वस्त्र पहने जाते है.

केरल के लोक नृत्य (Kerala folk dance) –

मोहिनीअट्टम – यह नृत्य शास्त्रीय परम्परा पर ही आधारित है. यह अपने नाम के अनुसार ही मोहित करने वाला नृत्य होता है. इस नृत्य में आँखों के, हाथों के तथा चेहरे के हाव्-भाव बहुत अधिक महत्वपूर्ण होते है. इसमें न्रात्यांगना केरल की विशेष सफ़ेद रंग की सुनहरी जरी वाली साड़ी पहनती है. यह नृत्य मूल रूप से हिन्दू पौराणिक कथाओ पर आधारित होता है.

कथकली – कथकली में एक नृत्य नाटिका अर्थात एक कथा का विवरण प्रस्तुत किया जाता है. इसमें विभिन्न पुराणों जैसे महाभारत या रामायण आदि के चरित्रों का रूपांतरण किया जाता है.  इस नृत्य की वेशभूषा बहुत ही सुन्दर एवं आकर्षित करने वाली होती है. इसमें विशेष वस्त्र  एवं आभूषणों जैसे सर पर मुकुट आदि का प्रयोग किया जाता है. इस नृत्य में हाथों की मुद्राओं एवं चेहरे भावों का विशेष महत्व रहता है.

उत्तराखंड के लोक नृत्य (Uttarakhand folk dance) –

छौलिया नृत्य – उत्तराखंड में किया जाने वाला सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य छौलिया है. ऐसा माना जाता है की उत्तराखंड के छौलिया लोक नृत्य का इतिहास कई दशकों पुराना है. इस नृत्य का चलन उत्तराखंड में उस समय से है, जब विवाह तलवार की नोक पर हुआ करते थे. छौलिया नृत्य विवाह के मौके पर किया जाता है. जब बारात निकलती है तो बारात में कुछ पुरुष पारंपरिक वेशभूषा पहने यह नृत्य करते है और इसी तरह दुल्हन के घर तक जाया जाता है.

बिहार के लोक नृत्य (Bihar folk dance) –

विदेशिया – बिहार में किया जाने वाला विदेशिय नृत्य भोजपुरी भाषी नृत्य है. विदेशिय नृत्य बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रसिद्ध है. यह नृत्य मनोरंजन से भरपूर होता है. साथ ही इसमें समाज से जुडी बुराइयों को समाप्त करने का सन्देश भी दिया जाता है.

पश्चिम बंगाल के लोक नृत्य (West Bengal folk dance) –

छाऊ नृत्य – पश्चिम बंगाल का छाऊ नृत्य गीत संगीत से भरपूर होता है. यह बहुत ही सशक्त छवि वाला नृत्य होता है. छाऊ नृत्य पश्चिम बंगाल के साथ साथ उड़ीसा और बिहार में भी किया जाता है. इन प्रदेशों में यह नृत्य कई मौको पर किया जाता है, जैसे- सूर्य पूजा आदि. इस नृत्य में रामायण एवं महाभारत आदि की घटनाओं का वर्णन किया जाता है. मुखौटे इस नृत्य का विशेष आकर्षण होते है.

जात्रा – जात्रा एक नाट्य अभिनय युक्त लोक नृत्य है. जिसमे अभिनय के साथ-साथ गीत, संगीत, वाद विवाद आदि होता है. पश्चिम बंगाल में जात्रा का इतिहास बहुत ही पुराना है.

हिमाचल प्रदेश के लोक नृत्य (Himachal Pradesh folk dance) –

थाली – हिमाचल में लोक नृत्य विशेष महत्व रखते है. यहाँ कई मौकों पर जैसे त्यौहार, शादी आदि पर विभिन्न लोक नृत्य किये जाते है. थाली नृत्य में नर्तक एवं गायक एक गोल घेरे में बैठते है, इसमें नर्तक एक-एक कर के अपनी प्रस्तुति देते है. इस नृत्य में नर्तक एक विशेष ढंग से अपने शरीर को हिलाता है. थाली नृत्य को और अधिक आकर्षित बनाने के लिए नर्तक सर पर पानी से भरा लोटा रख कर भी नृत्य करते है.

ओड़िसा के लोक नृत्य (Orrisa folk dance) –

ओडिसी – ऐसा माना जाता है कि ओडिसी नृत्य का प्रारंभ मंदिरों में नृत्य करने वाली देवदासियों के नृत्य के द्वारा हुआ. ओडिसी नृत्य में मुख्यतः भगवान् कृष्णा और विष्णु के अवतार की कथाएं बताई जाती है एवं भगवान् जगन्नाथ का वर्णन भी किया जाता है. जगन्नाथ रथ यात्रा की कहानी यहाँ पढ़ें. ओडिसी नृत्य के भी कई पुरातात्विक प्रमाण पाए जाते है. यह बहुत ही प्राचीन कला है. ओडिसी नृत्य में हस्त मुद्राएँ बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है.

तो दोस्तों ये थी जानकारी भारत के लोक नृत्यों के बारे में | ज़रूर याद कर लेना आप | ये बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं

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